
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने राज्य में कैब एग्रीगेटर्स (जैसे ओला, उबर) और डिलीवरी सेवा प्रदाताओं (जैसे जोमैटो, स्विगी, ब्लिंकिट) पर नकेल कसने के लिए एक बड़ी और सख्त नियमावली को मंजूरी दे दी है. शासन द्वारा जारी की गई अधिसूचना के अनुसार, प्रदेश में ‘उत्तर प्रदेश मोटर यान (तैतीसवां संशोधन) (समूहक और वितरण सेवा प्रदाता) नियमावली, 2026’ तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है.
इस नए नियम के तहत अब राज्य में संचालित सभी मौजूदा एग्रीगेटर्स और डिलीवरी कंपनियों को 90 दिनों के भीतर अनिवार्य रूप से लाइसेंस लेना होगा. बिना लाइसेंस के काम करने वाली कंपनियों पर 25 हजार से लेकर 1 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा.
यात्रियों और चालकों की सुरक्षा के लिए बड़े कदम
नई नियमावली में यात्री सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है:
5 लाख रुपये का यात्री बीमा: एग्रीगेटर कंपनियों को यात्रा करने वाले प्रत्येक यात्री के लिए न्यूनतम 5 लाख रुपये का बीमा कवरेज सुनिश्चित करना होगा.
पैनिक बटन और लाइव ट्रैकिंग अनिवार्य: सभी वाहनों में पैनिक बटन (Panic Button) और AIS-140 मानकों के अनुरूप व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (VLTD) होना अनिवार्य है, जो सीधे सरकारी कमांड सेंटर से जुड़े होंगे.
महिला सुरक्षा के लिए विशेष फीचर: ऐप में महिला यात्रियों को अपनी ही पसंद के अनुसार महिला चालक (यदि उपलब्ध हो) चुनने का विकल्प देना होगा. इसके अलावा ऐप में यात्रा के दौरान लाइव लोकेशन शेयर करने की सुविधा भी होगी.
चाइल्ड-लॉक रहेगा डिसेबल: सुरक्षा के मद्देनजर तिपहिया और बसों को छोड़कर अन्य यात्री वाहनों में चाइल्ड-लॉक सिस्टम को पूरी तरह अक्षम (Disable) रखना होगा ताकि आपातकाल में यात्री गाड़ी से बाहर निकल सके.
चालकों (ड्राइवर्स) का होगा कड़ा वेरिफिकेशन और ट्रेनिंग
कंपनियों को अब अपनी मर्जी से किसी को भी ऑनबोर्ड करने की छूट नहीं होगी:
कड़ा पुलिस और मेडिकल वेरिफिकेशन: ऑनबोर्डिंग से कम से कम 7 दिन पहले पुलिस द्वारा चालक के चरित्र का सत्यापन (Police Verification) होना चाहिए. इसके अलावा डॉक्टरों द्वारा चिकित्सा व दृष्टि परीक्षण और एक पंजीकृत मनोचिकित्सक द्वारा मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन (Psychological Evaluation) कराया जाना अनिवार्य है.
अपराधियों पर नो-एंट्री: पिछले 3 वर्षों के भीतर शराब/मादक पदार्थों के प्रभाव में गाड़ी चलाने वाले या किसी भी अन्य गंभीर/संज्ञेय अपराध (जैसे यौन अपराध, चोरी, हिंसा) में दोषी ठहराए गए व्यक्तियों को चालक नहीं बनाया जा सकेगा.
40 घंटे की ट्रेनिंग अनिवार्य: ऑनबोर्डिंग से पहले चालकों को ऐप के उपयोग, यातायात नियमों, प्राथमिक चिकित्सा (फर्स्ट एड) और ‘जेंडर सेंसिटाइजेशन’ पर न्यूनतम 40 घंटे की ट्रेनिंग लेनी होगी.
चालकों के लिए कल्याणकारी योजनाएं और कमाई का नया ढांचा
सरकार ने कंपनियों द्वारा चालकों के शोषण को रोकने के लिए भी कड़े प्रावधान किए हैं:
कमाई का 80% हिस्सा ड्राइवर को: यदि चालक का खुद का वाहन है, तो कुल किराए का कम से कम 80% हिस्सा दैनिक आधार पर चालक को मिलेगा, कंपनी अधिकतम 20% ही अपने पास रख सकती है. कंपनी के स्वामित्व वाले वाहनों में चालक को न्यूनतम 60% हिस्सा मिलेगा.
हेल्थ और एक्सीडेंट इंश्योरेंस: प्रत्येक चालक के लिए 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा और 10 लाख रुपये का दुर्घटना (टर्म) बीमा सुनिश्चित करना कंपनी की जिम्मेदारी होगी.
नो-रिस्ट्रिक्शन पॉलिसी: कोई भी कंपनी चालकों को एक साथ दूसरी एग्रीगेटर कंपनियों के साथ काम करने से नहीं रोक सकती.
रद्दीकरण (Cancellation) और मनमाने किराए पर रोक
डायनेमिक प्राइसिंग की सीमा तय: मांग बढ़ने पर कंपनियां मनमाना किराया नहीं वसूल सकेंगी। वे बेस फेयर (आधार किराया) के न्यूनतम 50% से लेकर अधिकतम 150% (डेढ़ गुना) तक ही ‘डायनेमिक प्राइसिंग’ या सर्च चार्ज लगा सकती हैं.
राइड कैंसिल करने पर जुर्माना: यदि ड्राइवर बिना किसी वैध कारण के बुकिंग स्वीकार करने के बाद राइड कैंसिल करता है, तो उस पर किराए का 10% (अधिकतम ₹100) जुर्माना लगेगा. यदि गाड़ी तय समय से 10 मिनट लेट होती है और यात्री राइड कैंसिल करता है, तो भी ड्राइवर पर ₹100 जुर्माना लगेगा और यात्री को अगली राइड में उतनी छूट मिलेगी. यात्रियों द्वारा गाइडलाइंस के उल्लंघन में राइड कैंसिल करने पर भी जुर्माना देय होगा.
पूरी टिप ड्राइवर की: ऐप में ग्राहकों द्वारा दी जाने वाली स्वैच्छिक टिप पूरी की पूरी बिना किसी कटौती के सीधे चालक के खाते में ट्रांसफर करनी होगी.
प्रदूषण नियंत्रण और ग्रीन मोबिलिटी पर जोर
एनसीआर में सख्त नियम: दिल्ली-एनसीआर के जिलों (नोएडा, गाजियाबाद आदि) में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के निर्देशों का पालन करना होगा. एनसीआर में 1 जनवरी 2026 से पारंपरिक पेट्रोल/डीजल पर चलने वाले नए टू-व्हीलर या फोर-व्हीलर वाहनों को फ्लीट में शामिल करने पर पूरी तरह रोक है. वहां केवल सीएनजी या इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर ही नए शामिल किए जा सकेंगे.
सालाना 5% इलेक्ट्रिक वाहनों की वृद्धि: राज्य के अन्य हिस्सों में भी सभी एग्रीगेटर कंपनियों को अपने फ्लीट में हर साल कम से कम 5% इलेक्ट्रिक या शून्य-उत्सर्जन वाहनों की संख्या बढ़ानी होगी. इसके साथ ही 12 वर्ष से अधिक पुराने वाहनों को ऑनबोर्ड नहीं किया जा सकेगा.
भारी-भरकम लाइसेंस फीस और सख्त दंडात्मक कार्रवाई
कंपनियों को लाइसेंस के लिए भारी शुल्क चुकाना होगा:
आवेदन और लाइसेंस शुल्क: नए लाइसेंस और नवीनीकरण के लिए ₹5,00,000 की फीस तय की गई है, जबकि आवेदन शुल्क ₹25,000 है.
लाइसेंस की वैधता: यह लाइसेंस 5 वर्षों के लिए वैध होगा. देरी से नवीनीकरण कराने पर प्रति दिन ₹1,000 से ₹2,000 तक की पेनाल्टी लगेगी.
₹1 करोड़ तक का जुर्माना: नियमों का बार-बार उल्लंघन करने, सुरक्षा मानकों को पूरा न करने या गंभीर अनियमितताएं पाए जाने पर कंपनियों का लाइसेंस 3 महीने के लिए निलंबित किया जा सकता है. यदि लाइसेंस निलंबन संभव न हो, तो सक्षम प्राधिकारी कंपनियों पर 1 लाख रुपये से लेकर 1 करोड़ रुपये तक का भारी मौद्रिक जुर्माना लगा सकता है.
परिवहन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस नए नियम के लागू होने से न केवल उत्तर प्रदेश में यात्रा सुरक्षित और सुगम होगी, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर काम करने वाले लाखों ‘गिग वर्कर्स’ (चालकों और डिलीवरी पार्टनर्स) के अधिकारों और हितों की भी रक्षा हो सकेगी.










